इंडिया टुडे की वेबसाइट के मुताबिक़, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर और कई देशों में भारत के राजदूत रहने वाले पूर्व उप राष्ट्रपति अंसारी का कहना था कि लोग कठिनाईयों में घिरे हुए हैं, इसलिए क़दम उठाना ज़रूरी है, क्योंकि अगर यह प्रक्रिया जारी रहती है तो फिर जागने में देर हो जाएगी।
उन्होंने कहाः हम बहुत मुश्किल समय में जी रहे हैं। मैं इसकी डिटेल बयान नहीं कर सकता, लेकिन ईमानदारी से कहूं तो सच्चाई यह है कि भारतीय लोकतंत्र गहरे संकट में हैं।
हामिद अंसारी ने चेतावनी देते हुए कहा कि जिन सिद्धांतों की बुनियाद पर हमारे संविधान की प्रस्तावना का मसौदा तैयार किया गया, आज उन्हें पैरों तले रौंदा जा रहा है।
हामिद अंसारी ने कहाः "इस प्रक्रिया में सत्य की थाली में झूठ और थोखा परोसा जा रहा है, इसीलिए अकसर लोग इसे समझ नहीं पा रहे हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि बहुत ही ख़तरनाक प्रक्रिया चल रही है। हमारे लिए और देश के लिए बहुत ख़तरनाक है।"
हामिद अंसारी ने मार्च में एनसीपी प्रमुख शरद पवार, सीपीआई के महासचिव डी राजा और सीपीआई (एम) के महासचिव सीताराम येचुरी की उपस्थिति में भालचंद्र मुंगेकर की पुस्तक "संसद में मेरे एनकाउंटर्स" के विमोचन के अवसर पर यह टिप्पणी की थी।
उनका कहना था कि देश की वर्तमान स्थिति पर विदेशों में उसके दोस्त गहरी चिंता में हैं, जबकि राष्ट्र के दुश्मन ख़ुश हैं।
अंसारी ने कहा, कुछ ऐसा हो रहा है, जिस पर ध्यान देने की ज़रूरत है, इसलिए मैं डॉ. मुंगेकर के शब्दों को अलार्म समझता हूं, जो हमें सचेत कर रहे हैं कि हमें गुमराह किया जा रहा है, और अगर हम इस प्रक्रिया को जारी रखने की अनुमति देते हैं, तो फिर जागने के लिए बहुत देर हो चुकी होगी।